🙏 ॥ जय गणेशाय नमः ॥ 🙏

सोम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026: मार्गशीर्ष प्रदोष काल, पूजा विधि, कथा और मंत्र

Soma Pradosh Vrat Date 2026: सोम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026 में कब है?

प्रदोष व्रत हर मास की त्रयोदशी तिथि को संध्याकाल में भगवान शिव की आराधना के लिए रखा जाता है। जब यह त्रयोदशी सोमवार को पड़े, तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। सोमवार शिव का प्रिय वार है और मार्गशीर्ष मास को भगवद्गीता में स्वयं श्रीकृष्ण ने महीनों में श्रेष्ठ कहा है, इसलिए इस सोम प्रदोष का संयोग अत्यंत पुण्यकारी है।

सोम प्रदोष व्रत 2026: 21 दिसंबर, सोमवार | त्रयोदशी: 21 दिसंबर सायं 5:36 बजे से 22 दिसंबर दोपहर 2:23 बजे तक | प्रदोष काल: सायं 5:36 से रात्रि 8:13 बजे तक | मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष

सोम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026: सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक, मार्गशीर्ष में मनोकामना पूर्ति और चंद्र दोष शांति

इस वर्ष सोम प्रदोष व्रत सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को पड़ रहा है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 21 दिसंबर को सायं 5:36 बजे होगा और समापन 22 दिसंबर को दोपहर 2:23 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर व्रत 21 दिसंबर को ही रखा जाएगा। प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त सायं 5:36 बजे से रात्रि 8:13 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण 22 दिसंबर को सूर्योदय के पश्चात करें। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

ध्यान रखें: उपरोक्त समय भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित हैं। सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।


सोम प्रदोष व्रत का महत्व जाने

प्रदोष काल वह संध्या बेला है जब आकाश की लालिमा धरती पर उतरती है और भगवान शिव अपने गणों सहित कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि इस पवित्र काल में की गई शिव आराधना का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक होता है। शिव को इस समय ‘प्रदोषेश्वर’ कहा जाता है — वे संसार की समस्त पीड़ाओं को इस बेला में दूर करते हैं।

जब यह त्रयोदशी सोमवार को पड़े, तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। शिव पुराण में सोम प्रदोष को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि सोमवार स्वयं भगवान शिव का वार है। मार्गशीर्ष मास में इस सोम प्रदोष का संयोग अत्यंत दुर्लभ और फलदायी होता है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध से अभिषेक और ॐ नमः शिवाय का जप करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।


Soma Pradosh Vrat Puja Vidhi: सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सोम प्रदोष व्रत के दिन क्या करें: सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और श्वेत या भगवा वस्त्र धारण करें। मार्गशीर्ष के इस दुर्लभ सोम प्रदोष पर शिव का स्मरण करते हुए दिन आरंभ करें।
  • व्रत संकल्प: हाथ में जल और बेलपत्र लेकर भगवान शिव से मनोकामना पूर्ति, अकाल-संकट निवारण और परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत का संकल्प करें।
  • सोम प्रदोष व्रत के दिन क्या खाएं या पिएं: दिनभर फलाहार करें। दूध, खीर, फल, साबूदाना और सेंधा नमक ग्रहण किए जा सकते हैं। अनाज, प्याज, लहसुन और मांसाहार वर्जित है।
  • व्रत के नियम: दिनभर शिव नाम का जप करें। क्रोध, असत्य और विवाद से बचें। दिन में सोना वर्जित है। किसी के प्रति कटुवचन न कहें।
  • प्रदोष काल की तैयारी: संध्या से एक घंटे पूर्व पुनः स्नान करें। पूजा सामग्री में दूध, दही, शहद, घी, जल, बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा, चंदन, अक्षत, धूप और दीपक रखें।
  • प्रदोष काल में पूजा: सायं 5:36 से 8:13 बजे के प्रदोष काल में शिवलिंग पर पंचामृत और दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और चंदन अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें। महामृत्युंजय मंत्र और चंद्र बीज मंत्र का पाठ करें। प्रदोष स्तोत्रम का पाठ करें।
  • व्रत कथा: पूजा के बाद सोम प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करें। राजा धर्मगुप्त की कथा शिव कृपा का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
  • दान: मार्गशीर्ष में दूध, चावल, श्वेत वस्त्र या चाँदी का दान शुभ है। सोमवार को चंद्र से संबंधित वस्तुओं का दान विशेष फलदायी है।
  • पारण: अगले दिन 22 दिसंबर को सूर्योदय के पश्चात शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करके सात्विक भोजन से व्रत तोड़ें।

Soma Pradosh Vrat Katha: सोम प्रदोष व्रत की कथा

सोम प्रदोष व्रत कथा: राजा धर्मगुप्त की शिव भक्ति, अकाल का निवारण और मार्गशीर्ष में शिव कृपा की वर्षा

प्राचीन काल में एक राजा था जिसका नाम धर्मगुप्त था। वह न्यायप्रिय और भगवान शिव का परम भक्त था। किंतु एक बार उसके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। प्रजा दुखी थी। राजा के मन में यह जानने की इच्छा हुई कि इस संकट का कारण और निवारण क्या है।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

राजा के राज्य में एक वृद्ध शिव भक्त ब्राह्मण रहते थे। उन्होंने राजा को बताया: “राजन्, कार्तिक और मार्गशीर्ष मास के सोम प्रदोष का व्रत करो। त्रयोदशी के संध्याकाल में भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करो और जलाभिषेक करो। भोलेनाथ प्रसन्न होकर राज्य का संकट दूर करेंगे।

राजा ने उसी सोम प्रदोष को अपनी पत्नी और मंत्रियों के साथ विधिपूर्वक पूजन किया। पंचामृत से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप किया। रात्रि जागरण में शिव स्तोत्र पढ़े। अगले ही मास से राज्य में वर्षा हुई और अकाल का नाश हो गया।

भोलेनाथ की कृपा का कोई माप नहीं।
प्रदोष काल में की गई एक सच्ची पूजा संकट के पहाड़ को भी हटा देती है।

जो भक्त सोमवार की त्रयोदशी को प्रदोष काल में सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करता है,
उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
॥ ॐ नमः शिवाय ॥


सोम प्रदोष व्रत पर जपने योग्य मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र (सर्वसिद्धि के लिए)
ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र (आरोग्य और मोक्ष के लिए)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

चंद्र बीज मंत्र (सोम प्रदोष पर विशेष, मन की शांति के लिए)
ॐ सों सोमाय नमः

चंद्र गायत्री मंत्र (मनोकामना पूर्ति के लिए)
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि।
तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्॥

शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

यहाँ पढ़ें - प्रदोष स्तोत्रम


सोम प्रदोष व्रत: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोम प्रदोष व्रत दिसंबर 2026 में कब है? सोम प्रदोष व्रत सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को है। त्रयोदशी तिथि 21 दिसंबर को सायं 5:36 बजे आरंभ होगी।

प्रदोष काल का समय क्या है? 21 दिसंबर 2026 को प्रदोष काल का शुभ समय सायं 5:36 बजे से रात्रि 8:13 बजे तक रहेगा। यह समय नई दिल्ली के अनुसार है।

सोम प्रदोष और सामान्य प्रदोष में क्या अंतर है? जब त्रयोदशी सोमवार को पड़ती है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। सोमवार भगवान शिव का प्रिय वार है, इसलिए सोम प्रदोष सभी प्रदोषों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए? प्रदोष व्रत में दिनभर फलाहार रहें। दूध, फल, साबूदाना और सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है। अनाज, प्याज और लहसुन वर्जित है।

मार्गशीर्ष में सोम प्रदोष का विशेष महत्व क्यों है? मार्गशीर्ष मास को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना प्रिय मास बताया है। इस पवित्र मास में सोमवार और त्रयोदशी का संयोग शिव भक्ति के लिए अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत में कौन से मंत्र जपें? ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें। चंद्र बीज मंत्र ॐ सों सोमाय नमः और चंद्र गायत्री मंत्र का जप भी करें। महामृत्युंजय मंत्र और प्रदोष स्तोत्रम का पाठ विशेष फलदायी है।

सोम प्रदोष व्रत किसे विशेष रूप से करना चाहिए? जिनकी कुंडली में चंद्रमा पीड़ित हो, जो मानसिक अशांति या नींद न आने की समस्या से पीड़ित हों, या जो मनोकामना पूर्ति और परिवार में सुख-शांति चाहते हों, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी है।

सोम प्रदोष व्रत का पारण कब करें? व्रत का पारण अगले दिन 22 दिसंबर 2026 को सूर्योदय के पश्चात करें। पारण से पूर्व शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।

सोम प्रदोष व्रत में क्या दान करें? सोमवार को चावल, दूध, चाँदी, श्वेत वस्त्र या शंख का दान शुभ है। ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देना भी पुण्यदायी है। इससे चंद्रमा और शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।


काल हर, कष्ट हर, दुख हर, दरिद्र हर, सर्व रोग हर, सर्व पाप हर, नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव 🙏

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