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रवि प्रदोष व्रत 6 दिसंबर 2026: मार्गशीर्ष प्रदोष काल, पूजा विधि, कथा और मंत्र

Ravi Pradosh Vrat Date 2026: रवि प्रदोष व्रत दिसंबर 2026 में कब है?

रवि प्रदोष व्रत 6 दिसंबर 2026: रविवार को भगवान शिव का जलाभिषेक और सूर्य अर्घ्य, मार्गशीर्ष में आरोग्य और यश के लिए

प्रदोष व्रत हर मास की त्रयोदशी तिथि को संध्याकाल में भगवान शिव की आराधना के लिए रखा जाता है। जब यह त्रयोदशी रविवार को पड़े, तो उसे रवि प्रदोष कहते हैं। शिव को सूर्य का अधिष्ठाता माना गया है, इसलिए रवि प्रदोष पर शिव-सूर्य का यह संयोग आरोग्य, यश और दीर्घायु के लिए विशेष फलदायी है। मार्गशीर्ष मास की इस कृष्ण त्रयोदशी पर व्रत का फल और भी बढ़ जाता है।

रवि प्रदोष व्रत 2026: 6 दिसंबर, रविवार | त्रयोदशी: 6 दिसंबर रात्रि 12:51 बजे से 7 दिसंबर रात्रि 2:22 बजे तक | प्रदोष काल: सायं 5:24 से रात्रि 8:07 बजे तक | मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष

इस वर्ष रवि प्रदोष व्रत रविवार, 6 दिसंबर 2026 को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ रहा है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 6 दिसंबर को रात्रि 12:51 बजे होगा और समापन 7 दिसंबर को रात्रि 2:22 बजे होगा। प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त सायं 5:24 बजे से रात्रि 8:07 बजे तक रहेगा, इसी अवधि में शिव पूजन और रुद्राभिषेक करना श्रेयस्कर है। व्रत का पारण 7 दिसंबर को सूर्योदय के पश्चात करें। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

ध्यान रखें: उपरोक्त समय भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित हैं। सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।


रवि Pradosh Vrat Ka Mahatva: रवि प्रदोष व्रत का महत्व जाने

मार्गशीर्ष मास की त्रयोदशी एक ओर से शिव की प्रिय तिथि है और दूसरी ओर यह महीना श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं अपना स्वरूप बताया है। ऐसे मास में जब प्रदोष रविवार को पड़े, तो यह अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी संयोग बनता है।

रवि प्रदोष पर सूर्य और शिव की एक साथ उपस्थिति भक्त को दोहरा आशीर्वाद देती है। सूर्य आरोग्य और दीर्घ आयु के प्रदाता हैं, शिव कल्याण और मोक्ष के। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि प्रदोष काल में भगवान शिव स्वयं तांडव करते हुए भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। रवि प्रदोष पर रुद्राभिषेक करने से भक्त को शरीर में ऊर्जा, रोगों से मुक्ति और यश की प्राप्ति होती है। शिव पुराण के अनुसार इस दिन बेलपत्र चढ़ाकर पंचाक्षरी मंत्र का जप करने मात्र से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्त को सूर्य के समान तेज और दीर्घ आयु का वरदान देते हैं।


Ravi Pradosh Vrat Puja Vidhi: रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • रवि प्रदोष व्रत के दिन क्या करें: सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। प्रातःकाल सूर्य को जल और लाल पुष्प से अर्घ्य दें। रवि प्रदोष पर यह क्रिया नेत्र रोग और यश के लिए विशेष फलदायी है।
  • व्रत संकल्प: हाथ में जल और लाल पुष्प लेकर भगवान शिव से आरोग्य, यश, दरिद्रता निवारण और दीर्घायु के लिए व्रत का संकल्प करें।
  • रवि प्रदोष व्रत के दिन क्या खाएं या पिएं: दिनभर फलाहार करें। दूध, फल, साबूदाना, मखाने और सिंघाड़े का आटा ग्रहण किए जा सकते हैं। अन्न, प्याज, लहसुन और मांसाहार वर्जित है।
  • व्रत के नियम: दिनभर शिव-सूर्य का स्मरण रखें। क्रोध, असत्य और विवाद से बचें। दिन में सोना वर्जित है। किसी से कटुवचन न कहें।
  • प्रदोष काल की तैयारी: संध्या से एक घंटे पूर्व पुनः स्नान करें। पूजा सामग्री में दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा, भस्म, चंदन, अक्षत, धूप और दीपक रखें।
  • प्रदोष काल में पूजा: सायं 5:24 से 8:07 बजे के प्रदोष काल में शिवलिंग पर पंचामृत और दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन और श्वेत पुष्प अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें। महामृत्युंजय मंत्र, सूर्य गायत्री मंत्र का पाठ करें। प्रदोष स्तोत्रम का पाठ भी करें।
  • व्रत कथा: पूजा के बाद रवि प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण अवश्य करें। दरिद्र ब्राह्मण परिवार की कथा शिव की करुणा का प्रमाण है।
  • दान: रविवार को गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र या ताँबे का दान शुभ है। मार्गशीर्ष में दान का फल विशेष बढ़ जाता है।
  • पारण: अगले दिन 7 दिसंबर को सूर्योदय के पश्चात सूर्य को अर्घ्य देकर सात्विक भोजन से व्रत तोड़ें।

Ravi Pradosh Vrat Katha: रवि प्रदोष व्रत की कथा

रवि प्रदोष व्रत कथा: दरिद्र ब्राह्मणी की भक्ति, राजा को शिव का स्वप्न और बालक की कारागार से मुक्ति

प्राचीन काल की बात है। एक गाँव में अत्यंत दीन ब्राह्मण अपनी पत्नी और पुत्र के साथ रहता था। घर में घोर दरिद्रता थी, परंतु ब्राह्मण की पत्नी भगवान शंकर के प्रदोष व्रत का नियम कभी नहीं तोड़ती थी। एक दिन उनका पुत्र गंगा स्नान के लिए निकला। रास्ते में चोरों ने उसे घेरा, धन माँगा। बालक ने सरलता से कहा कि पोटली में माँ की बनाई रोटी है। चोरों ने छोड़ दिया। आगे चलकर बालक थककर एक नगर के पास बरगद की छाया में सो गया। राजा के सिपाही चोरों की खोज में थे। उन्होंने सोते हुए बालक को संदेहास्पद समझकर राजा के सामने प्रस्तुत किया और राजा ने उसे कारागार में डाल दिया।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

उसी रात, जब बालक की माँ प्रदोष व्रत कर रही थी, भगवान शिव ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए। उन्होंने कहा: “राजन, जिस बालक को तुमने बंदी बनाया है वह निर्दोष है। उसकी माँ मेरी भक्त है और उसके व्रत की शक्ति से मैं यहाँ आया हूँ। यदि प्रातःकाल तक उसे मुक्त नहीं किया, तो तुम्हारा राज्य-वैभव शीघ्र नष्ट हो जाएगा। राजा की नींद टूटी, वह भयभीत और पश्चाताप से भर गया।

भगवान शिव का स्वप्न-संदेश राजा के लिए जागरण बना।
एक माँ के व्रत की शक्ति ने पुत्र को कारागार से मुक्त करा दिया।

प्रातःकाल राजा ने बालक को बुलाया, उसका वृतान्त सुना और उसके माता-पिता को भी ससम्मान बुलवाया। जब राजा ने उनकी दरिद्रता देखी तो उसका हृदय करुणा से भर गया। उसने ब्राह्मण परिवार को पाँच गाँव दान किए और क्षमा माँगी। शिव की उस अलौकिक कृपा से वह दीन ब्राह्मण परिवार आनंदपूर्वक जीवन बिताने लगा।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

भगवान शिव स्वप्न में भी आकर अपने भक्त की रक्षा करते हैं।
जो प्रदोष व्रत को श्रद्धा और निष्ठा से करता है, शिव उसके लिए स्वयं साक्षी बनते हैं।


रवि प्रदोष व्रत पर जपने योग्य मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र (सर्वसिद्धि के लिए)
ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र (आरोग्य और मोक्ष के लिए)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

सूर्य गायत्री मंत्र (रवि प्रदोष पर विशेष, आरोग्य और यश के लिए)
ॐ भास्कराय विद्महे महादित्याय धीमहि।
तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्॥

सूर्य बीज मंत्र (नेत्र रोग और दरिद्रता नाश के लिए)
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

यहाँ पढ़ें - प्रदोष स्तोत्रम


रवि प्रदोष व्रत: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रवि प्रदोष व्रत दिसंबर 2026 में कब है? रवि प्रदोष व्रत दिसंबर 2026 में 6 दिसंबर, रविवार को है। यह मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है। प्रदोष काल सायं 5:24 से रात्रि 8:07 बजे तक रहेगा।

मार्गशीर्ष के रवि प्रदोष का क्या महत्व है? मार्गशीर्ष मास श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं अपना स्वरूप बताया है। इस मास में की गई पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे मास में रविवार का प्रदोष संयोग अत्यंत दुर्लभ और विशेष फलदायी है।

रवि प्रदोष पर सूर्य को अर्घ्य क्यों देते हैं? रविवार सूर्य देव का वार है। रवि प्रदोष पर प्रातः सूर्य को जल और लाल पुष्प से अर्घ्य देने से शिव और सूर्य दोनों की कृपा एक साथ मिलती है। यह नेत्र रोग, त्वचा रोग और यश की प्राप्ति के लिए विशेष माना गया है।

रवि प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए? रवि प्रदोष व्रत में दिनभर फलाहार करें। दूध, फल, साबूदाना, मखाने और सिंघाड़े का आटा ग्रहण किए जा सकते हैं। अन्न, प्याज, लहसुन और मांसाहार वर्जित है। पारण 7 दिसंबर को सूर्योदय के बाद करें।

रवि प्रदोष व्रत का पारण कब करें? व्रत का पारण अगले दिन 7 दिसंबर 2026 को सूर्योदय के पश्चात करें। पारण से पूर्व सूर्य को अर्घ्य दें और शिवलिंग पर जल-बेलपत्र अर्पित करें।

रवि प्रदोष व्रत में कौन से मंत्र जपें? ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें। सूर्य बीज मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का जप करें। महामृत्युंजय मंत्र और प्रदोष स्तोत्रम का पाठ भी फलदायी है।

रवि प्रदोष व्रत किसे विशेष रूप से करना चाहिए? जो लोग नेत्र रोग, त्वचा रोग या दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हों, जिन्हें सरकारी कार्यों में बाधा हो, या जो यश और प्रतिष्ठा चाहते हों, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी है।

रवि प्रदोष व्रत में क्या दान करें? रविवार को गेहूँ, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र या सोने का दान शुभ है। किसी नेत्रहीन को सहायता करना या रोगियों की सेवा करना इस दिन विशेष पुण्यदायी है।


काल हर, कष्ट हर, दुख हर, दरिद्र हर, सर्व रोग हर, सर्व पाप हर, नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव 🙏

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