लाभ चतुर्थी 2026: 13 नवंबर, तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि
Labh Chaturthi Vrat Date 2026: लाभ चतुर्थी 13 नवंबर 2026 को कब है?
साल भर में 12 विनायक चतुर्थियां आती हैं, और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी लाभ चतुर्थी के रूप में जानी जाती है। मुद्गल पुराण और स्कंद पुराण दोनों में इस व्रत का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस वर्ष यह विशेष चतुर्थी दीपावली के बाद आने के कारण ‘लाभ चतुर्थी’ के नाम से भी जानी जाती है। दीपावली पर माँ लक्ष्मी का आगमन होता है और लाभ चतुर्थी पर गणपति की पूजा से घर में उस लक्ष्मी को टिकाए रखने और नए शुभ कार्यों का आरंभ करने का संकल्प लिया जाता है। गुजरात और राजस्थान में यह दिन व्यापारी वर्ग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस दिन नई बहीखाते खोली जाती हैं और नए व्यापार का श्रीगणेश किया जाता है।
लाभ चतुर्थी 2026: 13 नवंबर, शुक्रवार | चतुर्थी तिथि: 12 नवंबर सायं 6:09 से 13 नवंबर रात्रि 8:42 तक | कार्तिक महीने, शुक्ल पक्ष

इस वर्ष लाभ चतुर्थी (विनायक चतुर्थी) शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ रही है। चतुर्थी तिथि 12 नवंबर को सायं 6:09 बजे आरंभ होगी और 13 नवंबर को रात्रि 8:42 बजे समाप्त होगी। पूजा का श्रेष्ठ मध्याह्न मुहूर्त 13 नवंबर को प्रातः 11:17 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक रहेगा। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा।
ध्यान रखें: मध्याह्न मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
लाभ चतुर्थी का महत्व जाने
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को लाभ चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहा जाता है। गणेश पुराण में वर्णित है कि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भगवान गणपति को अत्यंत प्रिय है और मध्याह्न काल में की गई गणेश आराधना सबसे अधिक फलदायी होती है। “विनायक” का अर्थ है वह जो बिना किसी नायक के स्वयं ही सर्वोच्च हैं, जो समस्त विघ्नों का नाश करते हैं।
दीपावली के बाद यह पहली चतुर्थी होती है। दीपावली पर माँ लक्ष्मी की पूजा से घर में धन और समृद्धि का आगमन होता है, किंतु उस समृद्धि को स्थायित्व देने के लिए विघ्नहर्ता गणपति की कृपा आवश्यक है। इसीलिए लाभ चतुर्थी पर गणेश पूजन का विशेष महत्व है। गुजरात और राजस्थान में व्यापारी वर्ग इस दिन नई बहीखाते खोलते हैं, उस पर ‘श्री गणेशाय नमः’ और ‘शुभ लाभ’ लिखकर गणपति के चरणों में रखते हैं। नया व्यवसाय, नया वाहन, नई योजना या किसी भी शुभ कार्य का आरंभ इस दिन करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि कार्तिक मास में गणेश पूजन से धन, विद्या और सुख की प्राप्ति होती है।
Labh Chaturthi Vrat Puja Vidhi: लाभ चतुर्थी की पूजा विधि
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें, क्योंकि गणपति पूजन में ये रंग शुभ माने जाते हैं।
- घर के पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- मध्याह्न मुहूर्त (11:17 AM से 1:30 PM) में पूजा आरंभ करें, क्योंकि लाभ चतुर्थी पर मध्याह्न काल सर्वश्रेष्ठ है।
- सबसे पहले गणपति का आवाहन करें और जल, अक्षत तथा फूल चढ़ाकर उन्हें आसन पर प्रतिष्ठित करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गुड़) से गणपति को स्नान कराएं और लाल या पीले वस्त्र से उनका श्रृंगार करें।
- 21 दूर्वा की गांठें, मोदक, तिल के लड्डू, नारियल, गुड़ और मौसमी फल गणेश जी को अर्पित करें, क्योंकि मुद्गल पुराण में ये विशेष रूप से अनुशंसित हैं।
- धूप और दीप प्रज्वलित करके ॐ लाभाय गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और मन को शांत रखते हुए श्रद्धा भाव से पूजन करें।
- पूजा के अंत में गणेश आरती करें और परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती में भाग लें।
- इस दिन लाभ चतुर्थी की व्रत कथा सुनना या पढ़ना अवश्य करें, क्योंकि कथा श्रवण के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- दिनभर सात्विक भोजन करें और संभव हो तो निर्जल व्रत रखें, साथ ही क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।
- इस दिन तुलसी पत्र गणेश जी को न चढ़ाएं, क्योंकि शास्त्रों में इसका निषेध बताया गया है।
- व्यापारियों के लिए: अपनी नई बहीखाते पर ‘श्री गणेशाय नमः’ और ‘शुभ लाभ’ लिखकर गणपति के चरणों में रखें, नया व्यवसाय या वाहन खरीदना इस दिन विशेष शुभ है।
Labh Chaturthi Vrat Katha: लाभ चतुर्थी व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक नगर में एक वैश्य व्यापारी रहता था। वह अत्यंत परिश्रमी था किंतु उसके व्यापार में निरंतर हानि हो रही थी। दीपावली पर माँ लक्ष्मी की पूजा के बाद भी उसके कारोबार में कोई सुधार नहीं हुआ। वह हताश होकर एक ऋषि के पास गया और अपनी व्यथा सुनाई।
ऋषि ने कहा, “वत्स, तुम लक्ष्मी की पूजा करते हो किंतु विघ्नहर्ता गणपति की उपेक्षा करते हो। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को जो लाभ चतुर्थी है, उस दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करो। उन्हें 21 दूर्वा की गाँठें, मोदक और नारियल अर्पित करो। अपनी नई बहीखाते पर ‘श्री गणेशाय नमः’ लिखो और उनसे व्यापार में लाभ की प्रार्थना करो।”
व्यापारी ने वैसा ही किया। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को विधिपूर्वक गणपति की पूजा की, नई बहीखाते की शुरुआत की और नए संकल्प के साथ काम में लग गया। उसी वर्ष से उसके व्यापार में उन्नति होने लगी। उसने जीवनभर इस व्रत को जारी रखा और अपने परिवार में भी यह परंपरा चलाई।
गणपति विघ्नहर्ता हैं, उनकी कृपा से हर कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है।
लाभ चतुर्थी पर उनकी आराधना से व्यापार, परिवार और जीवन में स्थायी शुभ-लाभ की प्राप्ति होती है।
जो भक्त लाभ चतुर्थी पर मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा श्रद्धापूर्वक करता है,
उसके जीवन में समस्त विघ्न दूर होते हैं और गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
॥ गणपति बप्पा मोरया ॥
लाभ चतुर्थी व्रत में जपे ये मंत्र
॥ जय गणेशाय नमः ॥
पूजा आरंभ से पहले - वक्रतुण्ड स्तोत्र (Mudgala Purana से)
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
पूजा के आरंभ में इसका पाठ करें। इसका अर्थ है कि हे वक्रतुण्ड गणेश, आप सूर्य के समान तेजस्वी हैं। कृपया मेरे सभी कार्यों को निर्विघ्न बनाएं।
मूल बीज मंत्र (Ganesha Maha Mantra - Mudgala Purana)
ॐ गं गणपतये नमः ॥
इस मंत्र का 108 बार जाप रुद्राक्ष या हल्दी की माला पर करें। यह गणेश जी का सबसे सिद्ध बीज मंत्र है।
जप विधि: मध्याह्न मुहूर्त में यह जप विशेष फलदायी है।
लाभ चतुर्थी के लिए विशेष मंत्र (Skanda Purana से)
ॐ लाभाय गणपतये नमः ॥
व्यापार और आर्थिक समृद्धि के लिए इस मंत्र का जप करें। हे लाभ-दायक गणपति, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
विघ्ननाशक मंत्र (Obstacle-Removing Mantra)
ॐ गं गौं गणपतये विघ्न विनाशिने स्वाहा ॥
किसी विशेष बाधा या समस्या के समाधान के लिए इस मंत्र का जप करें। हे गणपति, विघ्नों का नाश करने वाले, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
गणेश गायत्री मंत्र (Ganesha Gayatri - Mudgala Purana)
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
प्रातः और संध्या काल में इस मंत्र का जप बुद्धि और विद्या की वृद्धि करता है। हम एकदंत गणेश को जानते हैं, हम वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वह हाथी-मुखी देव हमें प्रेरित करें।
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लाभ चतुर्थी व्रत: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लाभ चतुर्थी 2026 में कब है?
लाभ चतुर्थी (विनायक चतुर्थी) शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को है। चतुर्थी तिथि 12 नवंबर सायं 6:09 बजे आरंभ होकर 13 नवंबर रात्रि 8:42 बजे समाप्त होगी। उदया-तिथि के अनुसार व्रत 13 नवंबर को रखा जाएगा।
लाभ चतुर्थी का क्या महत्व है?
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को लाभ चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहा जाता है। दीपावली के बाद यह पहली चतुर्थी होती है। दीपावली पर माँ लक्ष्मी का आगमन होता है और लाभ चतुर्थी पर गणेश पूजन से उस लक्ष्मी को घर में स्थायी रूप से बनाए रखने का वरदान मिलता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
लाभ चतुर्थी पर पूजा का सर्वोत्तम समय मध्याह्न मुहूर्त है जो 13 नवंबर को प्रातः 11:17 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक रहेगा। इसी समय में गणेश पूजा विशेष फलदायी होती है।
लाभ चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
लाभ चतुर्थी और विनायक चतुर्थी एक ही व्रत के दो नाम हैं। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। गुजरात में इसे ‘लाभ पंचमी’ के साथ मनाया जाता है और दीपावली के बाद नए व्यापार-व्यवसाय आरंभ करने का यह शुभ दिन है।
लाभ चतुर्थी व्रत में कौन सी कथा सुनी जाती है?
इस व्रत में एक व्यापारी की कथा सुनी जाती है जिसका व्यापार दीपावली के बाद भी मंद था। एक ऋषि की सलाह से उसने लाभ चतुर्थी पर गणेश पूजन किया और अपनी नई बहीखाते पर ‘श्री गणेशाय नमः’ लिखा, जिससे उसके व्यापार में उन्नति हुई।
लाभ चतुर्थी व्रत में कौन सा मंत्र सबसे महत्वपूर्ण है?
इस व्रत में ॐ लाभाय गणपतये नमः लाभ-दायक गणेश का विशेष मंत्र माना जाता है। साथ ही ॐ गं गणपतये नमः बीज मंत्र का 108 बार जाप भी विशेष फलदायी है।
क्या लाभ चतुर्थी पर नया वाहन खरीद सकते हैं?
हाँ, लाभ चतुर्थी नए वाहन, नया व्यवसाय, नई योजना और किसी भी शुभ कार्य के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ दिन है। विशेष रूप से मध्याह्न मुहूर्त में गणेश पूजन के बाद यह कार्य करें।
क्या इस दिन व्रत रखना आवश्यक है?
लाभ चतुर्थी मुख्यतः पूजन का पर्व है। व्रत रखना वैकल्पिक है किंतु यदि आप व्रत रखें तो सात्विक भोजन करें। व्यापारियों के लिए नई बहीखाते खोलना और नए कार्य आरंभ करना विशेष महत्वपूर्ण है।
॥ गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया ॥


